निवेश ऋण

1. बाग़बानी (फल, फूल, सब्जियां) और बाग़ान फसलो के विकास के लिए धनराशि देने की योजना.

 

हेतु:

आर्थिक सहायता मुख्यत: नए फलोद्यान या फल की फसल, बाग़ान फसल, सजावटी फसल, औषधीय पौधें, आवश्यक तेलिया/सुगन्धित पौधें वगैरा के संस्थापन और विकास, प्रवर्तमान फलोद्यान या बाग़ानो के कायाकल्प, सब्जियां उगाने में, फूल की फसलें उगाने में, बागबानी की फसलो में अन्तराल सस्य, बीनना, क्रमबद्ध करना, टोकरे में एकत्र करना, भेजना और परिवहन जैसे खर्चों के लिए मुहैया करवाई जाएगी.

 

योग्यता:

अनुबद्ध जमीन धारण के साथ व्यक्तिगत किसान या किसानो का समूह, और सार्वजनिक क्षेत्र संस्थान या निजी संगठन जो परियोजना के आधार पर फलो के वृक्ष या अन्य किफ़ायती पौधों की रोपस्थली के लिए आर्थिक सहायता के ईच्छुक हो.

 

सुविधा की प्रकृति:

उत्पाद के हेतुओं के लिए कम अवधि की लोन या नगद ऋण और फलोद्यान या सब्जी/फूल के उद्यानो के विकास के लिए मध्य अवधि की लोन दी जाती है.

 

लोन की सीमा:

जरूरत पर आधारित. हालांकि, कार्यशील पूँजी लोन का आधार धनराशि के पैमाने पर आधारित होगा. अगर विपणन लोन पर भी विचार किया जाता है तो वह फसल के अनुमानित मूल्य के 20 फीसदी से ज्यादा नहीं बढता है.

 

सगर्भता अवधि:

सगर्भता अवधि उगाए जानेवाले विविध प्रकार के पौधों/पेडों के हिसाब से अलग अलग होगी.

 

लोन का पुन:भुगतान:

अनुबद्ध जमीन धारण के साथ व्यक्तिगत किसान या किसानो का समूह, और सार्वजनिक क्षेत्र संस्थान या निजी संगठन जो परियोजना के आधार पर फलो के वृक्ष या अन्य किफ़ायती पौधों की रोपस्थली के लिए आर्थिक सहायता के ईच्छुक हो.

 

योग्यता:

कम समय की लोन:

फसल लोन: अगर उत्पादन और निवेश ऋण की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लोन संयुक्त लोन के स्वरूप में नहीं दी जाती है तो सब्जी, फूलों की फसलें या अन्य अन्तराल सस्य के लिए अदा की गई लोन की वसूली फसल लुनने के 6-8 हफ़्तो के अंदर की जाएगी. संयुक्त लोन के स्वरूप में दी गई लोन के किस्सो में, लोन की वसूली 4-5 सालों में की जाएगी.

 

विपणन लोन:

पुन:भुगतान लोन की तारीख से 4 महिनो के अंदर.

 

मध्य अवधि लोन:

मध्य अवधि लोन के लिहाज़ से पुन:भुगतान अवधि (सगर्भता के साथ) 4-15 सालों की मर्यादा में होगी.

 

2. वनविद्या विकास कार्यक्रमो के लिए धनराशि देने की योजना.

हेतु:

मुद्दती लोन लुनने के समय तक संवर्धन गृह, बाग़ान और वन वृक्ष उगाने के लिए दी जाएगी. अन्तराल सस्य के लिए लोन देने की विचारणा भी उगाए जानेवाली फसलो के आधार पर की जाती है.

 

योग्यता:

किसान, कंपनियाँ, राज्य संस्थान जिनके पास जमीन पर अपने नाम के मालिकाना/पट्टभूमि/ चिरस्थायी काश्तकारी अधिकार है वे इस योजना के तहत लोन मुहैया करवाने के लिए योग्य माने जाएंगे.

 

लोन की सीमा:

जरूरत पर आधारित.

 

लोन का पुन:भुगतान:

(i) वन्य बाग़ान: जिसमें पेड उगाएं जाते है वह योजना के लिए लोन का पुन:भुगतान माफ़ी अवधि सहित महत्तम 15 सालों की अवधि के अंदर होना चाहिए.

(ii) संवर्धन गृह: संवर्धन गृह कम समय के अंदर आमदनी देने की शुरुआत करता है इसलिए पूरी मुद्दती लोन का पुन:भुगतान 5 सालों के अंदर निर्धारित होना चाहिए.

 

3. खुमी उगाने के लिए धनराशि देने की योजना.

हेतु:

निवेश ऋण और कार्यशील पूँजी के लिए लोन देने का विचार किया जाता है (सिर्फ प्रथम एक फसल के लिए).

 

योग्यता:

खुमी उगाने का पर्याप्त अनुभव हो ऎसी व्यक्तिगत व बडे कद की ईकाईओ के लिए लोन देने की विचारणा की जाती है.

 

लोन की सीमा:

जरूरत पर आधारित.

 

लोन का पुन:भुगतान:

कर्जदार की पुन:भुगतान क्षमता के आधार पर सगर्भता अवधि सहित अधिकतम 7 साल.

 

4. जैट्रोफ़ा बाग़ान

जैट्रोफा एक तेल पैदा करनेवाली फसल है जिसे बायो-डीज़ल के स्त्रोत के तौर पर पहचाना गया है. आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, गुजरात, राजस्थान, कर्णाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओरिस्सा, झारखंड कुछ ऎसे आशास्पद राज्य है जहां यह वनस्पति गाँवो और शहरो के पास अर्धवन्य झाडी या झुरमुट और काँटेदार वनस्पति के रूप में पैदा होती है. उसके सख्त स्वभाव, तेल की ज्यादा प्रतिप्राप्ति और तेल के गुण के कारण यह फसल ज्यादा योग्य पायी गई है. इसे निम्नीकृत जमीन, खेतों की सरहदे, बंजर भूमि पर रोपा जा सकता है जो छोटे और उपांतिक किसानो को भी ध्यान केन्द्रित करने में सहाय करती है.
जैट्रोफ़ा बाग़ान के निम्न बडे लाभ है:

  • जैट्रोफा तेल डीज़ल का शक्तिशाली विकल्प है जो परिवहन और बिजली के लिए देश को ऊर्जा का सस्ता और पुन:प्राप्य स्त्रोत प्रदान करता है और विदेशी हुण्डी पर बडी बचत पर असर कर सकता है.
  • जैट्रोफा तेल का साबुनीकरण मूल्य बहुत ज्यादा है और साबुन, ल्युब्रिकैंट व मोमबत्ती बनाने के लिए इसका व्यापक इस्तेमाल होता है. जैट्रोफा तेल टिकिया में मौजूद प्रोटीन का उपयोग प्लास्टिक और कृत्रिम फायबर के कच्चे माल के लिए हो सकता है.
  • जैट्रोफा पौधे का औषधीय मूल्य भी बहुत ज्यादा है. जैट्रोफा के क्षीर में जैट्रोफाइन नामक आल्कलोइड होता है जिसका प्रयोग दवाईयोँ में होता है.
  • जैट्रोफा तेल की टिकिया नाईट्रोजन, फौस्फ़रस और पोटेशियम से समृद्ध है और कार्बनिक खाद के तौर पर उसका इस्तेमाल हो सकता है.
  • बंजर और अनाच्छादित पहाडियों पर जैट्रोफा पौधे उगाने से पर्यावरणीय प्रदूषण से रक्षण मिलता है.
  • हेतु:

    जैट्रोफा बाग़ान के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी जो बंजर जमीन के विकास के लिए ऋण जुडा हो सकता है.

     

    योग्यता:

    • व्यक्तिगत किसान या किसानो का समूह और
    • सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान और निजी संगठन जो जैट्रोफा बाग़ान के लिए आर्थिक सहायता चाहते हो.

     

    लोन की प्रकृति:

    बाग़ान के विकास के लिए मध्यावधि लोन और जिसमें अन्तराल सस्य शामिल हो वह फसल सम्बन्धित कार्यो के लिए ऋण.

     

    लोन की सीमा:

    जरूरत पर आधारित. हालांकि, अधीक्षक कर्ज़दार को विकास की चीज़े, खेती का खर्च, अनुमानित उपज और आमदनी वगैरा का विवरण देनेवाला परियोजना रिपोर्ट पेश करने का सुझाव दिया जाता है.

     

    लोन का पुन:भुगतान:

    मूलधन के पुन:भुगतान के लिए चार साल की माफ़ी अवधि और ब्याज के भुगतान के लिए दो साल स्वीकार्य है. माफ़ी अवधि के सहित लोन का पुन:भुगतान 8 सालों में हो सकता है.

     

    ज्यादा जानकारी के लिए, कृपया पंजाब नैशनल बैंक की नजदीकी शाखा का संपर्क करें.

    1. पशु-पालन योजनाएं

    मुरगी-पालन के लिए धनराशि देने की योजना में शेड्स के निर्माण और एक तरफ उपकरण की खरीदी तथा दूसरी तरफ एक दिन की आयु वालें मुर्गी के बच्चे, खुराक, दवाईयाँ वगैरा की खरीदी के लिए निवेश ऋण प्रदान किया जाता है. निम्न प्रकार से अधीक्षक़ कर्जदारो को आर्थिक सहायता मुहैया करवाई जाएगी:-

     

    हेतु:

    सहायक प्रवृत्ति के लिए:

    स्थिर संपत्ति प्राप्त करने के लिए मध्यावधि लोन के आकार में निवेश ऋण प्रदान किया जाएगा जबकि कार्यशील पूँजी जरूरतो को पूर्ण करने के लिए कम अवधि की लोन के आकार में उत्पादन ऋण दिया जाएगा.

     

    मुख्य प्रवृत्ति के लिए:

    निवेश ऋण मध्यावधि लोन के स्वरूप में प्रदान किया जाएगा जब कि उत्पादन ऋण नगद ऋण मर्यादा के आकार में या निवेश ऋण के अखंड हिस्से के स्वरूप में दिया जाएगा.

     

    योग्यता:
    सहायक प्रवृत्ति के लिए:

    छोटे किसान, जमीनविहीन खेत मजदूर या जो कम नियोजित हो और जो मुर्गी-पालन के जरिए अपनी आमदनी बढाना चाहते हो ऎसे अन्य व्यक्ति. व्यक्ति के पास पर्याप्त जमीन/शेड होना चाहिए जहां वह पौल्ट्री फार्म स्थापित करना चाहता हो.

     

    मुख्य प्रवृत्ति के लिए:

    उम्मीदवार को पौल्ट्री ईकाई के संचालन का अच्छा अनुभव होना चाहिए और अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में व्यापारी आधार पर एसी प्रवृत्ति में जुटा हुआ होना चाहिए/जुटने के लिए ईच्छुक होना चाहिए. उसके पास जरूरी जमीन/शेड होना चाहिए जहां वह पौल्ट्री फार्म स्थापित या विस्तारित करने का इरादा रखता है.

     

    ईकाई कद:

    सहायक प्रवृत्ति के तौर पर जिसे धनराशि दी जानी है वह पौल्ट्री ईकाई का न्यूनतम कद 500 पंछियो का होना चाहिए.

     

    लोन की सीमा:

    लोन की सीमा जरूरत के आधार पर तय होगी.

     

    1.लोन का पुन:भुगतान:

    कम अवधि की लोन के रूप में दिये जाने वाले उत्पादन ऋण की वसूली क्रमानुसार लेयर्स और ब्रोइलर्स के किस्से में 6/3 महिनो की सगर्भता अवधि के साथ अधिकतम 18/12 महिनो में की जाएगी.
    छोटे किसानो के किस्से में उनकी पुन:भुगतान क्षमता के आधार पर निवेश लोन का पुन:भुगतान 6-7 साल की अवधि में योग्य मासिक/त्रैमासिक/छह-मासिक किश्तो में पर्याप्त सगर्भता अवधि (लेयर्स के किस्से में 12 महिनो तक और ब्रोइलर्स के किस्से में 3 महिनो तक) के बाद शुरू होगा.

     

    2. डेरी विकास कार्यक्रमो के लिए धनराशि देने की योजना.

    निम्नलिखित प्रवृत्तियों के लिए डेरी परियोजनाओं को धनराशि दी जाती है:-

    • I. दूध उत्पादन के लिए अच्छे गुणवाले ज्यादा उत्पादन देने वाले दुधारु प्राणीओं, जैसे गाय/भेंस या दोग़ली गायों की खरीदी के लिए व्यक्ति को धनराशि देना.
    • II. प्रथम दुग्धस्त्रवण के चरण तक बछडो की खरीदी और पालन के लिए व्यक्ति को धनराशि देना.
    • III. अन्य नवीन पशु-पालन प्रवृत्तियां जैसे मवेशियों का पालन, सूखी गर्भवती गाय को उबारना, दूध प्रक्रिया करने की सुविधाएं, दूध घरों का निर्माण वगैरा के लिए धनराशि देना